Sunday, 14 May 2017

HAPPY MOTHER'S DAY - POETRY BY TAHIR FARAZ AND MUNAWWAR RANA


HAPPY MOTHERS DAY TO ALL

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1.लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती..
    बस एक "माँ " है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती !

2. अभी ज़िन्दा है "माँ " मेरी मुझे कु्छ भी नहीं होगा..
    मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है !

3. कुछ नहीं होगा तो आँचल में छुपा लेगी मुझे..
    "माँ " कभी सर पे खुली छत नहीं रहने देगी !

4. खाने की चीज़ें "माँ "ने जो भेजी हैं गाँव से..
    बासी भी हो गई हैं तो लज़्ज़त वही रही !

5. मैंने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दीं..
    सिर्फ़ इक काग़ज़ पे लिक्खा "लफ़्ज़—ए—माँ " रहने दिया !

6. मुझे कढ़े हुए तकिये की क्या ज़रूरत है..
    किसी का हाथ अभी मेरे सर के नीचे है !

7. बुज़ुर्गों का मेरे दिल से अभी तक डर नहीं जाता..
    कि जब तक जागती रहती है "माँ " मैं घर नहीं जाता !

8. अब भी रौशन हैं तेरी याद से घर के कमरे..
    रौशनी देता है अब तक तेरा साया मुझको !

9. आँखों से माँगने लगे पानी वज़ू का हम..
    काग़ज़ पे जब भी देख लिया "माँ " लिखा हुआ !

10. ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता..
      मैं जब तक घर न लौटूं, मेरी "माँ " सज़दे में रहती है !

11. चलती फिरती आँखों से अज़ाँ देखी है..
      मैंने जन्नत तो नहीं देखी है "माँ " देखी है !

12. "माँ " के आगे यूँ कभी खुल कर नहीं रोना..
       जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती !

13. बरबाद कर दिया हमें परदेस ने मगर..
      "माँ " सबसे कह रही है कि बेटा मज़े में है !

14. दिया है "माँ " ने मुझे दूध भी वज़ू करके..
      महाज़े-जंग से मैं लौट कर न जाऊँगा !

15. दुआएँ "माँ " की पहुँचाने को मीलों मील जाती हैं..
      कि जब परदेस जाने के लिए बेटा निकलता है !

16 दिन भर की मशक़्क़त से बदन चूर है लेकिन..
     "माँ " ने मुझे देखा तो थकन भूल गई है !

17. जब भी देखा मेरे किरदार पे धब्बा कोई..
      देर तक बैठ के तन्हाई में रोया कोई !

18. ख़ुद को इस भीड़ में तन्हा नहीं होने देंगे..
      "माँ " तुझे हम अभी बूढ़ा नहीं होने देंगे !

19. हादसों की गर्द से ख़ुद को बचाने के लिए..
      "माँ " ! हम अपने साथ बस तेरी दुआ ले जायेंगे !

20. मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ..
      "माँ " से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ !

21. इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है..
      "माँ " बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है !

22. ऐ अँधेरे! देख ले मुँह तेरा काला हो गया..
      "माँ " ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया !

23. मुसीबत के दिनों में हमेशा साथ रहती है..
      पयम्बर क्या परेशानी में उम्मत छोड़ सकता है !

24. अब भी चलती है जब आँधी कभी ग़म की ‘राना’..
      "माँ " की ममता मुझे बाहों में छुपा लेती है !

25. मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू..
      मुद्दतों "माँ " ने नहीं धोया दुपट्टा अपना !

26. "बहन " का प्यार "माँ " की ममता दो चीखती आँखें..
       यही तोहफ़े थे वो जिनको मैं अक्सर याद करता था !

27. मेरे चेहरे पे ममता की फ़रावानी चमकती है..
      मैं बूढ़ा हो रहा हूँ फिर भी पेशानी चमकती है !

28. जब तक रहा हूँ धूप में चादर बना रहा..
      मैं अपनी "माँ "का आखिरी ज़ेवर बना रहा !

29. यहीं रहूँगा कहीं उम्र भर न जाउँगा..
      ज़मीन "माँ " है इसे छोड़ कर न जाऊँगा !

30. किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दूकान आई..
      मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में "माँ " आई !

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