Monday, 15 June 2026

Sufi Kalam by Sahib Ahmedabadi

 बहिश्त से भी है अफ़ज़ल फ़ज़ा मदीने में

हमारे दर्द की बस है दवा मदीने में


वसीला इस्म-ए-मोहम्मद का इस्म-ए-आज़म है

कभी तो मांग के देखो दुआ मदीने में


बस एक बार मेरी इल्तिजा सुनी जाए

हयात हो मेरी मक्का, क़ज़ा मदीने में


हर एक लौटने वाला पुकारता है यही

फिर एक बार बुलाए ख़ुदा मदीने में


पलट के जिस्म तो आया है साथ साथ मगर

हमारा दिल तो वहीं बस गया मदीने में


तमाम शाह ओ गदा हैं गदा उसी दर के

अजब है रहमत-ए-फ़ैज़-ए-ख़ुदा मदीने में


Poet Sahib Ahmedabadi 

Sufinama link

https://sfn.ma/et/0c06/2

Wednesday, 12 October 2022

Urdu Shayri by Sahib Ahmedabadi

Sahib Ahmedabadi

चंद रोज़ा जनाब है दुनिया
आख़िरत का हिसाब है दुनिया

तुम हक़ीक़त समझ रहे थे इसे
मैं न कहता था ख़्वाब है दुनिया

तुम अगर साथ हो तो जन्नत है
बिन तुम्हारे 'अज़ाब है दुनिया

अपने 'ऐबों से बे-ख़बर हूँ मैं
कैसे कह दूँ ख़राब है दुनिया

जिस को तुम ज़िंदगी समझते हो
मौत ज़ेर-ए-नक़ाब है दुनिया

एक कमसिन की मस्त आँखों का
कोई भूला सा ख़्वाब है दुनिया

पढ़ न पाओ समझ न पाओ जिसे
एक ऐसा निसाब है दुनिया

Poet : Sahib Ahmedabadi 

Rekhta.Org Link : 

https://rek.ht/et/1nbo

Friday, 22 April 2022

21 Ramadan Shahadat e Imam Ali...

#UrsMubarak #MaulaAli
ज़हे इ’ज़्ज़-ओ-जलाल-ए-बू-तुराबी फ़ख़्र-ए-इंसानी 
अली मुर्तज़ा मुश्किल-कुशा-ए-शेर-ए-यज़ादनी 

(वाह-रे फ़ख़्र-ए-इंसानी हज़रत अबू तुराब का इ’ज़्ज़त-ओ-जलाल !
कि अ’ली मुर्तज़ा, मुश्किल-कुशा, शेर-ए-यज़्दाँ हैं )

वली-ए-हक़ वसी-ए-मुस्तफ़ा दरिया-ए-फ़ैज़ानी 
इमाम-ए-दो-जहानी क़िब्लः-ए-दीनी-ओ-ईमानी 

(अल्लाह पाक के वली, मुस्तफ़ा के वसी और फ़ैज़ान का एक दरिया हैं 
जो दोनों जहान के इमाम और दीन-ओ-ईमान का क़िब्ला हैं )

'नियाज़' अंदर क़यामत बे-सर-ओ-सामाँ न-ख़्वाहद शुद 
कि अज़ हुब्ब-ओ-तवल्ला-ए-अली दारी तु सामानी 

(ऐ ‘नियाज़’! क़ियामत में तू बे-सर-ओ-सामान नहीं होगा 
क्यूँ कि तू मोहब्बत-ओ-इ’श्क़-ए-अ’ली का सामान रखता है )

Saturday, 2 April 2022

हिकायत ए मौलाना रूम र. अ. ज़िक्र की कबुलियत-1 रमजान 2022

मौलाना रूमी हिकायत बयान फरमाते हैं......

एक शख्स बड़ा इबादत गुजार,नेक और मुत्तक़ी था, शैतान ऐसे नेक लोगों को हमेशा अपने निशाने पर रखता है- ये नेक मर्द भी इब्लीस की नज़रों में खटक रहा था- एक रात ये शख्स इबादत में मसरूफ था और अल्लाह अल्लाह कर रहा था कि शैतान ने अपना सबसे कारगर हथियार (वसवसा) उस पर आज़माया- उसने उस शख्स के दिल में वसवसा डालना शुरू किया- और बोला:
              "अय(भोले) इंसान तू कितने एतमाद से अल्लाह अल्लाह कहता है-क्या तूने इस पुकार के जवाब में, अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की तरफ से एक मर्तबा भी लब्बैक की आवाज़ सुनी- क्या तुझे कभी तेरी पुकार का जवाब मिला,बारगाहे इलाही से तो एक भी जवाब नहीं आ रहा, तू कितनी मर्तबा शिद्दतो इस्तिक़ामत से अल्लाह अल्लाह का विर्द करता रहेगा-"
अल्लाह के नाम के विर्द से शैतान को बड़ी अज़ीयत होती है-जब अल्लाह का कोई बंदा उसका नाम जपने लगता है तो शैतान के हवास गुम होने लगते हैं- रूह को पाक करने का सबसे खासुल खास तरीक़ा जो बड़े बड़े सालेहीन ने इख्तियार किया है- वो ये है कि इसे ज़िक्रे इलाही से मामूर करते जाओ गंदगी और नापाकी खुद ही भाग जाएगी और इंसान की रूह पाक,साफ,खुश व खुर्रम और शादाबो आबाद हो जाएगी-

शैतान ने जब उस नेकदिल बंदे के दिल में वसवसा डाला तो उसने विर्द छोड़ दिया- और दिल शिकस्ता होकर बिस्तर पर दराज़ हो गया- रात हज़रते खिज़्र علیہ السلام उसके ख्वाब में तशरीफ ले आए और उस शख्स ने देखा कि वो हज़रत ख़िज़्र علیہ السلام के साथ एक सब्ज़ा ज़ार में है- आपने उससे सवाल किया:
           "अय नेक मर्द तू खामोश क्यूं हो गया है और क्यूं इस अफसुर्दा व मायूस हालत में लेटा हुआ है-"
उस शख्स ने गुज़ारिश की:
            "मैं विर्द करता हूं तो जवाब नहीं मिलता- मैं लब्बैक कहता हूं तो कोई आवाज़ पलट कर मेरे कानों में नहीं आती- शायद बारगाहे रब्बुल इज़्ज़त तक मेरी आवाज़ पहुंचती ही नहीं- मैं इस बात से खौफज़दा हो गया हूं और मायूस भी कि शायद मुझे बारगाहे इलाही से खारिज दिया गया है और मैं मरदूद हो चुका हूं-"

हज़रत ख़िज़्र علیہ السلام ने इरशाद फ़रमाया:
             "मुझे अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने तुम्हारे पास आने का हुक्म दिया है- और फ़रमाया है कि जाओ और मेरे इस नेक खसलत बंदे से कहो,अय मेरे बंदे तेरा ये मुझे पुकारना,तेरी ज़बान का विर्द अल्लाह अल्लाह से तर हो जाना, और हमारी याद में मशगूल होकर दुनियां के लाख झमेलों से बचे रहना ही हमारी लब्बैक है-वो कैफो सुरूर जो तुझे मयस्सर है यही हमारा क़ासिद है-"
"क्या मैंने तुझे अपने काम में नहीं लगा रखा? तेरे दिल की ये तड़प और तेरी मुहब्बत की वा रफ्तगी हमारी ही कशिश के बाइस है,

"किसी को इबादत की तौफीक़ अता हो जाना ही उसकी इबादत की क़ुबूलियत की दलील होती है-"
"दुआ मांगने वाले का पुकारना ही अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की तरफ से लब्बैक बन जाता है-"
जिससे अल्लाह नाराज़ हो जाए उसे अपनी इबादत की तौफीक़ ही नहीं देता-"
Hakayat-e-Rumi 
Source internet

Wednesday, 28 April 2021

कोरॉना और दीगर बीमारी से बचने की दुआ (हदीस शरीफ़ के मुताबिक)

🌺🌷ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🌺🌷

✅मुहम्मद ﷺ 
जब किसी मरीज(बीमार) के पास जाते या कोई मरीज उनके पास आता तो ये दुआ करते:"ऐ लोगों के परवरदिगार! बीमारी दूर कर दे,ऐ इंसानों के पालने वाले! शिफा अता फरमा, *तू ही शिफा देने वाला है,तेरी शिफा के सिवा और कोई शिफा नहीं*,ऐसी शिफा दे जिसमें मर्ज बिल्कुल बाकी न रहे"।

🌹حدیث:- عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا : أَنّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا أَتَى مَرِيضًا أَوْ أُتِيَ بِهِ ، قَالَ : أَذْهِبْ الْبَاسَ رَبَّ النَّاسِ ، اشْفِ وَأَنْتَ الشَّافِي لَا شِفَاءَ إِلَّا شِفَاؤُكَ شِفَاءً لَا يُغَادِرُ سَقَمًا . 

🌹हदीस:-आएशा रजियल्लाहु अन्हा ने फरमाया: मुहम्मद ﷺ जब किसी मरीज(बीमार) के पास तशरीफ ले जाते या कोई मरीज आपके पास लाया जाता तो आप ﷺ ये दुआ फरमाते:

"أَذْهِبْ الْبَاسَ رَبَّ النَّاسِ ، اشْفِ وَأَنْتَ الشَّافِي لَا شِفَاءَ إِلَّا شِفَاؤُكَ شِفَاءً لَا يُغَادِرُ سَقَمًا"

"ऐ लोगों के परवरदिगार! बीमारी दूर कर दे,ऐ इंसानों के पालने वाले! शिफा अता फरमा, *तू ही शिफा देने वाला है,तेरी शिफा के सिवा और कोई शिफा नहीं*,ऐसी शिफा दे जिसमें मर्ज बिल्कुल बाकी न रहे।"

🌷सहीह बुखारी,हदीस नं:5675.

 🌹اردو حدیث:- عائشہ رضی اللہ عنہا نے فرمایا: محمد ﷺ جب کسی مریض کے پاس تشریف لے جاتے یا کوئی مریض آپ کے پاس لایا جاتا تو آپ ﷺ یہ دعا فرماتے: 

"أَذْهِبْ الْبَاسَ رَبَّ النَّاسِ ، اشْفِ وَأَنْتَ الشَّافِي لَا شِفَاءَ إِلَّا شِفَاؤُكَ شِفَاءً لَا يُغَادِرُ سَقَمًا"

”اے لوگوں کے پروردگار ! بیماری دور کر دے، اے انسانوں کے پالنے والے! شفاء عطا فرما، *تو ہی شفاء دینے والا ہے۔ تیری شفاء کے سوا اور کوئی شفاء نہیں*، ایسی شفاء دے جس میں مرض بالکل باقی نہ رہے"۔ 

🌹Hadees:-Narrated `Aisha: Whenever Allah's Apostle paid a visit to a patient, or a patient was brought to him, he used to invoke Allah, saying,   Take away the disease, O the Lord of the people! *Cure him as You are the One Who cures. There is no cure but Yours*, a cure that leaves no disease. 

🌷Sahih Bukhari,Hadees No:5675.

*🕌Al-Ittehad Da’wah Center Ahmedabad*

Monday, 14 October 2019

Noor Ki Anjuman Fatima MANQABAT LYRICS and video september 2019


https://www.youtube.com/watch?v=sXguOvCaCdw

Noor Ki Anjuman Fatima
Markaz E Panjatan Fatima

Arsh Se Ban Ke Aayi Hai Tu
Murtaza Ki Dulhan Fatima

Kehkasha Se Ziyada Haseen
Tere Ghar Ka Chaman Fatima

Teri Mamta Ke Hai Do Nayan
Ik Hussain Ik Hasan Fatima

Khuld Ka Arsh Par Hai Dimaag
Chu Ke Tere Charan Fatima

Kab Kisi Maa Ne Paida Kiye
Phir Hussain O Hasan Fatima

Tere Shauhar Ke Dar Se Mila
Humko Rizqe Sukhan Fatima

Gair Ne Jisko Dekha Nahi
Tera Woh Pairahan Fatima

Monday, 25 June 2018

HAR DARD KI DAWA HAI SALLAY ALA MOHAMMED WITH LYRICS

Har dard ki dawa hai Salle ala Muhammad ,Tawize har bala hai Salle ala Muhammad .



Mahebube Kibriya hai Salle ala Muhammad ,Kya Naksha khushnuma hai Salle ala Muhammad .





Kurb-e-Khuda ho hasil , Jannat me wo ho dakhil ,Jisne likha padha haì Salle ala Muhammad .





Jannat makam hoga , Dozakh haram hoga ,Gar dilpe likhdiya hai Salle ala Muhammad .





Uski najat hogi , Rahmat bhi sath hogi ,Jo padhke margaya hai Salle ala Muhammad .





Jo dard la dawa ho ye ghol kar pi lo ,Kya nuskha-e-Shafa haì Salle ala Muhammad




ख्वाजा गरीब नवाज- मोईनुद्दीन चिश्ती अजमेर

Sufi Kalam by Sahib Ahmedabadi

 बहिश्त से भी है अफ़ज़ल फ़ज़ा मदीने में हमारे दर्द की बस है दवा मदीने में वसीला इस्म-ए-मोहम्मद का इस्म-ए-आज़म है कभी तो मांग के देखो दुआ मदीने मे...