Thursday, 9 July 2026

Ghazal by Sahib Ahmedabadi Bazm e Imkan

 **Bazm-e-Imkān** 🎙️🖋️

https://youtu.be/fzj-0mT8xd8

Har lafz ek ehsaas hai...

Har misra dil ki awaaz hai...


Pesh-e-khidmat ek nayi **Ghazal** —


**"Bazm-e-Imkān"**


✍️ **Written & Sung by Sahib Ahmedabadi**


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🎧 Full Reel Available Now





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Friday, 26 June 2026

Rutba Hussain Ka Manqabat

 Video link......Manqabat Maula Hussain


🖤 RUTBA Hussain A.S ka.. 🖤


यह कलाम हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की अज़मत, सब्र और कुर्बानी को एक अदब भरी पेशकश है।


✍️ Written & Sung By: Sahib Ahmedabadi

🎼 Music: Suno.ai

🎧 Mystic Faqeer




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Wednesday, 24 June 2026

Yaum e Ashura Dua Amaliyat ● दुआ ए आशुरा

Ashura Dua Hindi 

Dua e Yaum e Ashura Hindi 



बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

या क़ाबि ल तौबति आदमा यौमा आशूराअ

या फारिजा करबी ज़िन्नूनी यौमा आशूराअ

या जामी अ़ शमली याक़ूबा यौमा आशूराअ

या सामी अ़ दाअ़वती मूसा व् हारूना यौमा आशूराअ


या मुगि सा इब्राहिमा मिनन्नारी यौमा आशूराअ

या राफ़ीआ़ इदरीसा इलस्समाई यौमा आशूराअ


या मुजी बा दाअ़वती सालिहिन फिन्नाक़ती यौमा आशूराअ

या नासि रा सय्यीदिना मुह़म्मदिन सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वा आलिही वसल्लमा यौमा आशूराअ


या रह़मानद्दुनिया वल आख़िरती व् रह़िमाहुमा सल्ली अ़ला सय्यीदिना मुह़म्मदिंव व् अ़ला आली सय्यीदिना मुह़म्मदिंव व सल्ली अ़ला जमी-इल अम्बियाई वल मुरसलीना वक़दी ह़ाजातिना फिद्दुनिया वल आख़िरती व अतिल उमरना फी ताअ़तीका व मह़ब्बातिका व रिदाका व अह़इना ह़यातन तय्यबतंव्वा तवफ़्फ़ना अ़लल-ईमानी वल इस्लामी बिरह़मतिका या अरह़मर्राह़िमीन


अल्लाहुम्मा बीइज़्ज़िल ह़सानी व् अखीही व उम्मीही व् अबिहि व जद्दीही व् बनिहि फर्रिज अ़न्ना मा नाह़नू फ़ीहि (फिर 7 बार ये दुआ पढ़ें।)


सुब्ह़ानल्लाही मिल-अलमिज़ानी व् मुन्तहल-इल्मी व् मबलग़र्रिदा व ज़ी-नतल अ़र्शी लामल जाअ वला मन जाअ मिनल्लाही इल्ला इलैहि । सुब्ह़ानल्लाही अ़दादश्शफई वल वतरि व अ़दादा कलीमा-तिल्लाहित्ताम्माती कुल्लीहा नसअलु-कस्सलामता बिरह़मतिका या अर-ह़मर्राह़िमीन । व हुवा ह़सबुना व निअ़मल वकील । निअ़मल मौला व निअ़मन्नसीर । वलाह़ौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम । व सल्लल्लाहु तआ़ला अला सय्यीदिना मुह़म्मदिंव व्अ़ला आलिहि व सह़बिहि वअ़लल मु-मिनीना वल मु-मिनाती वल मुस्लिमीना वल मुस्लिमाति अ़दादा ज़र्रातिल वुजुदी व् अ़दादा मअ़लुमातिल्लाही वलह़म्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन । आमीन । सुम्मा आमीन ।




https://youtu.be/BqsZ00Pxjig


https://youtube.com/shorts/z_uTguAAGnk?si=epml6P5FGX0wujwg

Monday, 15 June 2026

Sufi Kalam by Sahib Ahmedabadi

 बहिश्त से भी है अफ़ज़ल फ़ज़ा मदीने में

हमारे दर्द की बस है दवा मदीने में


वसीला इस्म-ए-मोहम्मद का इस्म-ए-आज़म है

कभी तो मांग के देखो दुआ मदीने में


बस एक बार मेरी इल्तिजा सुनी जाए

हयात हो मेरी मक्का, क़ज़ा मदीने में


हर एक लौटने वाला पुकारता है यही

फिर एक बार बुलाए ख़ुदा मदीने में


पलट के जिस्म तो आया है साथ साथ मगर

हमारा दिल तो वहीं बस गया मदीने में


तमाम शाह ओ गदा हैं गदा उसी दर के

अजब है रहमत-ए-फ़ैज़-ए-ख़ुदा मदीने में


Poet Sahib Ahmedabadi 

Sufinama link

https://sfn.ma/et/0c06/2

Wednesday, 12 October 2022

Urdu Shayri by Sahib Ahmedabadi

Sahib Ahmedabadi

चंद रोज़ा जनाब है दुनिया
आख़िरत का हिसाब है दुनिया

तुम हक़ीक़त समझ रहे थे इसे
मैं न कहता था ख़्वाब है दुनिया

तुम अगर साथ हो तो जन्नत है
बिन तुम्हारे 'अज़ाब है दुनिया

अपने 'ऐबों से बे-ख़बर हूँ मैं
कैसे कह दूँ ख़राब है दुनिया

जिस को तुम ज़िंदगी समझते हो
मौत ज़ेर-ए-नक़ाब है दुनिया

एक कमसिन की मस्त आँखों का
कोई भूला सा ख़्वाब है दुनिया

पढ़ न पाओ समझ न पाओ जिसे
एक ऐसा निसाब है दुनिया

Poet : Sahib Ahmedabadi 

Rekhta.Org Link : 

https://rek.ht/et/1nbo

Friday, 22 April 2022

21 Ramadan Shahadat e Imam Ali...

#UrsMubarak #MaulaAli
ज़हे इ’ज़्ज़-ओ-जलाल-ए-बू-तुराबी फ़ख़्र-ए-इंसानी 
अली मुर्तज़ा मुश्किल-कुशा-ए-शेर-ए-यज़ादनी 

(वाह-रे फ़ख़्र-ए-इंसानी हज़रत अबू तुराब का इ’ज़्ज़त-ओ-जलाल !
कि अ’ली मुर्तज़ा, मुश्किल-कुशा, शेर-ए-यज़्दाँ हैं )

वली-ए-हक़ वसी-ए-मुस्तफ़ा दरिया-ए-फ़ैज़ानी 
इमाम-ए-दो-जहानी क़िब्लः-ए-दीनी-ओ-ईमानी 

(अल्लाह पाक के वली, मुस्तफ़ा के वसी और फ़ैज़ान का एक दरिया हैं 
जो दोनों जहान के इमाम और दीन-ओ-ईमान का क़िब्ला हैं )

'नियाज़' अंदर क़यामत बे-सर-ओ-सामाँ न-ख़्वाहद शुद 
कि अज़ हुब्ब-ओ-तवल्ला-ए-अली दारी तु सामानी 

(ऐ ‘नियाज़’! क़ियामत में तू बे-सर-ओ-सामान नहीं होगा 
क्यूँ कि तू मोहब्बत-ओ-इ’श्क़-ए-अ’ली का सामान रखता है )

Saturday, 2 April 2022

हिकायत ए मौलाना रूम र. अ. ज़िक्र की कबुलियत-1 रमजान 2022

मौलाना रूमी हिकायत बयान फरमाते हैं......

एक शख्स बड़ा इबादत गुजार,नेक और मुत्तक़ी था, शैतान ऐसे नेक लोगों को हमेशा अपने निशाने पर रखता है- ये नेक मर्द भी इब्लीस की नज़रों में खटक रहा था- एक रात ये शख्स इबादत में मसरूफ था और अल्लाह अल्लाह कर रहा था कि शैतान ने अपना सबसे कारगर हथियार (वसवसा) उस पर आज़माया- उसने उस शख्स के दिल में वसवसा डालना शुरू किया- और बोला:
              "अय(भोले) इंसान तू कितने एतमाद से अल्लाह अल्लाह कहता है-क्या तूने इस पुकार के जवाब में, अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की तरफ से एक मर्तबा भी लब्बैक की आवाज़ सुनी- क्या तुझे कभी तेरी पुकार का जवाब मिला,बारगाहे इलाही से तो एक भी जवाब नहीं आ रहा, तू कितनी मर्तबा शिद्दतो इस्तिक़ामत से अल्लाह अल्लाह का विर्द करता रहेगा-"
अल्लाह के नाम के विर्द से शैतान को बड़ी अज़ीयत होती है-जब अल्लाह का कोई बंदा उसका नाम जपने लगता है तो शैतान के हवास गुम होने लगते हैं- रूह को पाक करने का सबसे खासुल खास तरीक़ा जो बड़े बड़े सालेहीन ने इख्तियार किया है- वो ये है कि इसे ज़िक्रे इलाही से मामूर करते जाओ गंदगी और नापाकी खुद ही भाग जाएगी और इंसान की रूह पाक,साफ,खुश व खुर्रम और शादाबो आबाद हो जाएगी-

शैतान ने जब उस नेकदिल बंदे के दिल में वसवसा डाला तो उसने विर्द छोड़ दिया- और दिल शिकस्ता होकर बिस्तर पर दराज़ हो गया- रात हज़रते खिज़्र علیہ السلام उसके ख्वाब में तशरीफ ले आए और उस शख्स ने देखा कि वो हज़रत ख़िज़्र علیہ السلام के साथ एक सब्ज़ा ज़ार में है- आपने उससे सवाल किया:
           "अय नेक मर्द तू खामोश क्यूं हो गया है और क्यूं इस अफसुर्दा व मायूस हालत में लेटा हुआ है-"
उस शख्स ने गुज़ारिश की:
            "मैं विर्द करता हूं तो जवाब नहीं मिलता- मैं लब्बैक कहता हूं तो कोई आवाज़ पलट कर मेरे कानों में नहीं आती- शायद बारगाहे रब्बुल इज़्ज़त तक मेरी आवाज़ पहुंचती ही नहीं- मैं इस बात से खौफज़दा हो गया हूं और मायूस भी कि शायद मुझे बारगाहे इलाही से खारिज दिया गया है और मैं मरदूद हो चुका हूं-"

हज़रत ख़िज़्र علیہ السلام ने इरशाद फ़रमाया:
             "मुझे अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने तुम्हारे पास आने का हुक्म दिया है- और फ़रमाया है कि जाओ और मेरे इस नेक खसलत बंदे से कहो,अय मेरे बंदे तेरा ये मुझे पुकारना,तेरी ज़बान का विर्द अल्लाह अल्लाह से तर हो जाना, और हमारी याद में मशगूल होकर दुनियां के लाख झमेलों से बचे रहना ही हमारी लब्बैक है-वो कैफो सुरूर जो तुझे मयस्सर है यही हमारा क़ासिद है-"
"क्या मैंने तुझे अपने काम में नहीं लगा रखा? तेरे दिल की ये तड़प और तेरी मुहब्बत की वा रफ्तगी हमारी ही कशिश के बाइस है,

"किसी को इबादत की तौफीक़ अता हो जाना ही उसकी इबादत की क़ुबूलियत की दलील होती है-"
"दुआ मांगने वाले का पुकारना ही अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की तरफ से लब्बैक बन जाता है-"
जिससे अल्लाह नाराज़ हो जाए उसे अपनी इबादत की तौफीक़ ही नहीं देता-"
Hakayat-e-Rumi 
Source internet

ख्वाजा गरीब नवाज- मोईनुद्दीन चिश्ती अजमेर

Ghazal by Sahib Ahmedabadi Bazm e Imkan

 **Bazm-e-Imkān** 🎙️🖋️ https://youtu.be/fzj-0mT8xd8 Har lafz ek ehsaas hai... Har misra dil ki awaaz hai... Pesh-e-khidmat ek nayi **Ghaza...