Wednesday, 12 October 2022

Urdu Shayri by Sahib Ahmedabadi

Sahib Ahmedabadi

चंद रोज़ा जनाब है दुनिया
आख़िरत का हिसाब है दुनिया

तुम हक़ीक़त समझ रहे थे इसे
मैं न कहता था ख़्वाब है दुनिया

तुम अगर साथ हो तो जन्नत है
बिन तुम्हारे 'अज़ाब है दुनिया

अपने 'ऐबों से बे-ख़बर हूँ मैं
कैसे कह दूँ ख़राब है दुनिया

जिस को तुम ज़िंदगी समझते हो
मौत ज़ेर-ए-नक़ाब है दुनिया

एक कमसिन की मस्त आँखों का
कोई भूला सा ख़्वाब है दुनिया

पढ़ न पाओ समझ न पाओ जिसे
एक ऐसा निसाब है दुनिया

Poet : Sahib Ahmedabadi 

Rekhta.Org Link : 

https://rek.ht/et/1nbo

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